Description
पुस्तक परिचय: “भारतीय ज्ञान परंपरा-हमारे वैज्ञानिक” रूपी पुष्प जिसमें यथा- कणाद, बोधायन, चरक, आर्यभट, जीवक, पाणिनी, पतंजलि, वराहमिहिर, सुश्रुत, महावीराचार्य, भास्कराचार्य, वाग्भट, भारती कृष्ण तीर्थ,नागार्जुन आदि सभी के निश्चय ही शोधपरक कठोर साधना, अनथक अनवरत प्रयत्न, प्रज्ज्वलित निरंतर लगन, अध्ययन का अखंड प्रवाह, सत्य का शाश्वत चिंतन, नवाचारों को समर्पित स्वर्णिम स्वप्न, पूर्व गौरवशाली छवि की पुनर्प्रतिष्ठा की अभिलाषा, भावी भारत के पुनर्निर्माण का संकल्प और विश्व गुरु पद की पुनर्स्थापना आदि को साकार रूप देने वाला, अज्ञान रूपी अंधकार को हरने वाला, ज्ञान का नवल प्रभात लाने वाला, चहुँदिशि आशा का दीप जलाने वाला, विजयी उद्घोष करने वाला,खोई हुई पावन छवि को महिमा मंडित करने वाला, मलयागिरि वाली सुगंध बिखेरने वाला, समर्पित पुष्प को सौभाग्य प्राप्त हो यही अभीष्ट आकांक्षा है साधुवाद–आपका ही जगराम सिंह