Description
पुस्तक परिचय: भारतीय ज्ञान परंपरा-शिक्षा एवं दर्शन रुपी पुष्प प्राचीन वैज्ञानिक धरोहर की वह अकूत सम्पदा है जो उदधि के गर्भ में रत्न स्वरुप अनगिनत अनमोल मोती स्वरुप विद्यमान है,उन सभी को भावी पीढ़ी के सन्मुख बाहर लाने की एक मात्र साधना ही इस पुष्प का उद्देश्य है और जिसे भविष्य में संसार के समक्ष साक्ष्य सहित प्रस्तुत किया जा सके जिससे भारत का गौरव पुनर्स्थापित हो सकने में सहायक बन सके ऐसे ही कुछ मोती जो चुन सका यथा-ध्वनि, स्वर, लिपि, व्याकरण, छंद, भाषा, काव्य, शिक्षा, समाज, इतिहास, राजनय,अर्थ, धर्म, न्याय आ आदिक सेवा में संमर्पित हैं, जिनके कारण भारत का विश्वगुरुत्व का सपना पुनर्साकार हो सकेगा और भारत विश्व गुरु बनकर फिर से खड़ा हो सकेगा यही महती आकांक्षा इस पुष्प की आत्मा है, धन्यवाद—आपका ही-जगराम सिंह