Description
पुस्तक परिचय: गणित के बिना प्रौद्योगिकी की बात पूर्णतः अकल्पनीय ही होगी। क्योंकि इनके संबंध पारस्परिक हैं, एक दूसरे के पूरक हैं, संक्षेप में गणित को प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है और प्रौद्योगिकी को गणित की आवश्यकता होती है, इन दोनों का जीवन एक दूसरे पर पूर्णतः निर्भर है इसीलिए “भारतीय ज्ञान परंपरा-गणित एवं प्रौद्योगिकी” रूपी पुष्प जिसमें यथा-गणित, वैदिक गणित ,कालगणना, ज्योतिष, सामुद्रिक, भौतिक, खगोल, रसायन, विद्युत, धातु, रत्न, भूगर्भ आदि का विस्तारपूर्वक समावेश हुआ है, जो निश्चय ही प्राचीन भारतीय ज्ञान,विज्ञान प्रतिभा को विश्व पटल पर एक बार फिर से गौरवान्वित करने में सहायक सिद्ध होगा, यही इस पुष्प की अभीष्ट अभिलाषा है, धन्यवाद——- आपका ही- जगराम सिंह