#Meera_Cool  #मीरा_कूल

#Meera_Cool #मीरा_कूल

by Dr. Alka Agrawal Sigtia डॉ. अलका अग्रवाल सिग्तिया

₹325.00 ₹241.00 25% OFF

Ships in 1 - 2 Days

Secure Payment Methods at Checkout

  • ISBN13: 9789362871312
  • Binding: Paperback
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Pages: 142
  • Language: Hindi
  • Edition: 1st
  • Item Weight: 200GM
  • BISAC Subject(s): Sahitya
अलका अग्रवाल की व्यंग्य कहानियों का यह एक परिपक्व और भविष्य की ओर क़दम बढ़ाता दिलचस्प संग्रह है। इसमें कुल बाईस शीर्षक हैं, जो दो हज़ार के बाद के भारत का एक कोलाज बनाते हैं। ये बिल्कुल नये और आधुनिक विषयों को समेटे हैं।

जिस रूप में हिन्दी में आज व्यंग्य उपस्थित हुआ है, वह सम्भवतः पहली बार एक नयी विधा का रूप बना रहा है, उसे अभूतपूर्व प्रतिष्ठा हासिल हुई है। अलका अग्रवाल ने प्रारम्भ से ही हरिशंकर परसाई के मार्ग को चुना है। उनकी सोच और अभिव्यक्ति में व्यंग्य की धारा है। लेख, कहानी, शोध सभी रूपों में उन्होंने व्यंग्य-मार्ग की राह पकड़ी है और उसे अग्रसर करने, आधुनिक बनाने का काम किया है। यह बात इसलिए उल्लेखनीय है कि जब पश्चिम में व्यंग्य विधा का जो एक सघन और लम्बा इतिहास है, हिन्दी में वह एक टूटी-फूटी रेखा है। अनेक बड़े-छोटे उदाहरण हैं, वे छिन्न-भिन्न हैं।

अब नये सिरे से देखें तो आज परसाई की तरह व्यंग्य लेखन में अलका अग्रवाल सम्पूर्णता के साथ अपने को ढाल रही हैं। परसाई अगर क्लासिक हैं तो अलका अग्रवाल अभी समकालीन और अधुनातन हैं। सुरेन्द्र चौधरी मानते हैं कि सामान्य रूप से व्यंग्य, कहानी की ही विधा है, उसकी ही गली है।

अलका अग्रवाल की इन कहानियों में व्यंग्यात्मक भंगिमाएँ (Irotic Temper) ज़बरदस्त रूप से अभिव्यक्त हुई हैं। उनके कई शीर्षक देखिए : ‘लैंडिंग ऑफ़ मीरा ऑन अर्थ', ‘साईं इतना दीजिए...बी.एम.डब्ल्यू. आये’, ‘होंठों पर मुहब्बत के फ़साने नहीं आते', 'ई है इंडिया हमरी जान', और 'एकोहम, बाक़ी सब वहम'।

जहाँ तक मुझे याद है अलका अग्रवाल की प्रारम्भिक रचनाओं में विषय स्थानीय थे और उनका कलात्मक वैभव इतना सशक्त नहीं था। अब वे विषय भी नये चुन रही हैं, शैली में निखार भी आ रहा और कला की ऊँचाई भी कहानियों में बढ़ रही है। इसके अलावा उनकी युग-बोधक चेतना में पंख लग रहे हैं। अलका अग्रवाल के संग्रह के व्यंग्यों में आप कहानियाँ पढ़ सकते हैं, पढ़ हालाँकि ये कहानियाँ अभी परसाई की क्षमता के पास नहीं पहुँच सकी हैं। चूँकि अलका अग्रवाल लगातार लेखन कर रही हैं, इसलिए यह उम्मीद की जा सकती है कि वे आज देश की जैसी रक्तरंजित और हिंसक अवस्था है, उसका बेहतर लेखन भविष्य में करेंगी।

अलका अग्रवाल को छोटे से बड़े होते मैंने देखा है, इसलिए मेरी शुभकामनाएँ सदैव उनके साथ हैंI
-ज्ञानरंजन
डॉ. अलका अग्रवाल सिग्तिया
कहानी, व्यंग्य, कविता तीनों विधाओं में लेखन।
कहानी-संग्रह : ‘मुर्दे इतिहास नहीं लिखते’ महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादेमी के प्रथम पुरस्कार 'प्रेमचन्द सम्मान' से सम्मानित।
व्यंग्य - संग्रह : ‘मेरी, तेरी, सबकी’, ‘#मीरा_कूल’; उपन्यास : ‘अदृश्य’ प्रकाशित; लघु उपन्यास : ‘फेंस के इधर-उधर’; कहानी-संग्रह : ‘नदी अभी सूखी नहीं’; लघुकथा-संग्रह : ‘बिखरते हरसिंगार’; कविता-संग्रह : ‘खिड़की एक नयी सी’, ‘अखीन परसाई’ प्रेस में।
स्तम्भ लेखन : मैं कहती आँखन देखी, ये है बम्बई मेरी जान आदि, अनेक आलेख प्रकाशित।
सम्पादन : रंगक़लम, अप्रतिम भारत, मुम्बई की हिन्दी कवयित्रियाँ, अन्तरंग संगिनी।
हरिशंकर परसाई पर लघु शोध प्रबन्ध व शोध।
निरन्तरा स्क्रिप्ट, गोदरेज़ फ़िल्म फ़ेस्टिवल में प्रथम।
फ़िल्म ‘अदृश्य’ को राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय अवार्ड्स।
फ़िल्म, टेलीविज़न धारावाहिकों व रेडियो के लिए लेखन। कई लघु फ़िल्मों का निर्माण।
निदेशक परसाई मंच, राष्ट्रीय अध्यक्ष अन्तरराष्ट्रीय वामा साहित्य अकादेमी, अध्यक्ष राइटर्स व जर्नलिस्ट्स असोसिएशन महिला विंग मुम्बई, अध्यक्ष महाराष्ट्र अन्तरराष्ट्रीय महिला काव्य मंच, मेम्बर सी.एफ.बी.पी.।
सम्मान : महाराष्ट्र हिन्दी साहित्य अकादेमी, 'दुष्यन्त सम्मान', रचनाकार, आयेग (यू.के.) ‘स्वस्थ भारत सारथी’, 'आस्क सोसायटी सम्मान', व्यंग्य यात्रा, ‘नीरी’, ‘यादें बिस्मिल्लाह', 'करियर आफ्टर फ़ैमिली', 'सी. एफ.बी.पी.', 'स्त्री शक्ति सम्मान', 'साहित्य रत्न सम्मान', 'महाराष्ट्र जागतिक महिला सम्मान', 'अन्तरराष्ट्रीय महिला काव्य मंच का सम्मान' आदि।

Trusted for over 24 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us

You May Also Like

Recently Viewed