India Wins Freedom Azad Bharat Hindi Translation | An Autobiographical Narrative by Maulana Abul Kalam Azad
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- Binding: Paperback
- Publisher: Prabhat
- Pages: 248
- Language: Hindi
- Item Weight: 350
- BISAC Subject(s): History
वर्तमान परिस्थिति के आकलन में एक और मुद्दा उभरकर आया, जिसमें मेरे और गांधीजी के विचारों में मतभेद हो गया। गांधीजी अब ज्यादा-से-ज्यादा विश्वास करने लग गए थे कि मित्र देशों का जीतना कठिन है। उन्हें भय था कि इस युद्ध में कहीं जर्मनी और जापान न जीत जाएँ और यदि जीत न भी पाएँ तो स्थिति में गतिरोध न पैदा हो जाए।
मैंने यह भी नोट किया कि सुभाष चंद्र बोस के देश से पलायन का उन पर बहुत प्रभाव पड़ा है। पहले उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के अनेक कार्यों पर अपनी असहमति दर्ज की थी, लेकिन अब मैं यह देख रहा था कि उनका रुख बदल रहा है।
अंततः भारत आजाद हुआ, किंतु एकता को अक्षुण्ण नहीं रख पाया। एक नया देश पाकिस्तान बना, जिसका निर्माण मुसलिम लीग ने किया था। लिहाजा स्वाभाविक रूप से वही सत्ता में आई। मैं पहले भी कह चुका हूँ कि मुसलिम लीग की पैदाइश केवल कांग्रेस के विरोध से ही हुई थी। इसलिए उसे न तो राजनीतिक समझ थी और न ही उसके नेताओं ने आजादी के आंदोलन में हिस्सा लिया था, जो उन्हें राजनीतिक रूप से राज-काज सँभालने का ज्ञान देता। पाकिस्तान के नेताओं में राजनीतिक अनुभव शून्य था।
- इसी पुस्तक से
स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री व भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक मौलाना अबुल कलाम आजाद की आत्मकथा, जिसमें उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और भारत-विभाजन के विषय में विस्तार से और बेबाकी से लिखा है।
मैंने यह भी नोट किया कि सुभाष चंद्र बोस के देश से पलायन का उन पर बहुत प्रभाव पड़ा है। पहले उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के अनेक कार्यों पर अपनी असहमति दर्ज की थी, लेकिन अब मैं यह देख रहा था कि उनका रुख बदल रहा है।
अंततः भारत आजाद हुआ, किंतु एकता को अक्षुण्ण नहीं रख पाया। एक नया देश पाकिस्तान बना, जिसका निर्माण मुसलिम लीग ने किया था। लिहाजा स्वाभाविक रूप से वही सत्ता में आई। मैं पहले भी कह चुका हूँ कि मुसलिम लीग की पैदाइश केवल कांग्रेस के विरोध से ही हुई थी। इसलिए उसे न तो राजनीतिक समझ थी और न ही उसके नेताओं ने आजादी के आंदोलन में हिस्सा लिया था, जो उन्हें राजनीतिक रूप से राज-काज सँभालने का ज्ञान देता। पाकिस्तान के नेताओं में राजनीतिक अनुभव शून्य था।
- इसी पुस्तक से
स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री व भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक मौलाना अबुल कलाम आजाद की आत्मकथा, जिसमें उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और भारत-विभाजन के विषय में विस्तार से और बेबाकी से लिखा है।
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